Thursday, 30 January 2014

यौन हिँसा/ Sexual Exploitation

The human desires are never ending and love is one such element which every living being urges for. The love crosses its boundaries and Sex is another such element which justifies the extremity of Love. But when it start losing its credibility and shapes up in negative form, the inhumanity comes into picture.

Today's society is facing such exploitation where love/sex image has been tarnished. Surprisingly the inhumanity has crept so deep that people are nowhere hesitant in crossing all limits. The fairer sex is no longer safe in anywhere in this world and the saddest part is when some people objects on the dressing instead of commending on the action. 

What about a school going kid who gets sexually harassed by teacher or by some old age person.. ? 
What about a wife's sexual exploitation by her own husband...?
A lot more can be discussed if we come forward..
Here's a poem by me on Sexual Harassment/Exploitation where I have tried to focus on all kinds of life and people who are affected...
Pls do give your inputs...


हुस्न कि चाहत आज कुछ इस क़दर हावी है,
हर कली बिन खिले बेदर्दी से मसली जाती है,
ग़र यह चाहत होती तो कोई और बात थी,
लेकिन वह तो हैवानियत की नीयत से रंगी जाती है।

सेवानिवृत्त की उम्र में जिस्म की कैसी लोलुपता है,
फूल सी मासूमियत को हवस के लिए कुचला जाता है,
अब सभ्यता और संस्कार इतनी ढोंगी हो गयी,  
कि जिस्मानी भूख के लिए इंसानियत को बेचा जाता है।

अपना बनाने के आड़ में विवाह का नाटक होता रहा,
पत्नी बता कर न जाने उसपे कितना अत्याचार होता रहा,
बिस्तर कि तड़प इतनी मचलती है,
हर रात पति-पत्नी के रिश्तों का बलात्कार होता रहा।

शिक्षा और मिसाल देने का अधिकार मिला है समाज में,
गुरु बना कर ईश्वर से भी ऊँचा दर्जा मिला है समाज में,
फिर क्यूँ किया अपने ही शिष्यों से दुराचार,
क्या कच्ची उम्र का होना अभिशाप है इस समाज में।


कोई ज्ञान देने कि कोशिश नही कि है सिर्फ एक सच सामने लाने कि कोशिश की है, जिससे हमारा ही समाज आहत  है।  यह होता है हर कहीं बस जुबां खुलने में संकोच करती है जिससे दरिंदों का सर ऊँचा होता है और, उन्हें ऐसे कुकर्मों के लिए बढ़ावा मिल जाता है।  लोग भी शोषित को दोष देते है लेकिन कानून उसका और बुरा हॉल कर देती है जब, ऐसे अराधियों को सख्त सज़ा नहीं दी जाती है।  भूख कितनी विभित्स हो गयी है हैम सब भली भाँती जानते है इसलिए, अपने आस पास लोगों को नींद से जगाइए और एक बेहतर पड़ोस बनाएं, समाज अपने आप सुधर जायेगा।  
बस इतनी ही प्रार्थना है.... 

Be Blessed & Be Happy..! :)



Pic Courtesy : Google

Monday, 6 January 2014

नशा / Intoxification

There are number of songs/Poetry on Wine or Intoxication. मसलन : दो घूंट मुझे भी पिला दे साक़ी, देख फिर होता है क्या , शीशे से पी या पैमाने से पी... there are numerous. Everybody knows about great Mirza Ghalib n his drinking habits. Its true that any kind of intoxication, be it alcoholic or non-alcoholic, takes your mental condition to a different level. But its also to be noted that too much of habit to get kick, kicks out the life & drags one into the grave. The pathetic thing is when family/personality/character gets affected...


In view of the after-effects of Intoxication, I wrote this..
खूब जमेगा जब मिल बैठेंगे सारे यार ,
बहेगी व्हिस्की , वोडका या रम की बहार ...
माहौल बनेगा यादों को कुरेदने का ,
कुछ शरारतें, कुछ मासूमियत ज़िक्र करने का ...
और फिर नशे में धुत्त कदम लडखडाते ,
चल देंगे अपने आशियाने के तरफ ...
लेकिन ...
अक्सर ऐसा नहीं होते देखा मैंने ,
नशे में चूर बदहवास इंसान देखा मैंने ,
लडखडाते क़दमों पे बिखरता जहां देखा मैंने ,
शराब की लत में लुटते घर देखे मैंने ,
परिवार को उजड़ते देखा मैंने ,
क़र्ज़ और बीमारी में इंसान को रेंगते देखा मैंने ....
इंसानियत की सीमा पार कर ,
इस नशे ने कितने कुकर्म को जन्म दिए ...
अर्थव्यवस्था की सुधार के लिए ,
इस सोमरस ने जाने कितनों के प्राण ले लिए ...
कुछ पल की चाहत में ,
इस मय के प्याले ने कितने होश बिगाड़ दिए ...
क्या मिलता है ऐसे नशे से ,
जो बनता भी है तो उसके अस्तित्व को मिटा कर ...
क्यों पिए है ऐसा द्रव्य ,
जिससे जिस्म भी छलनी होता रहता कई बार ...
गर ये कोई सहारा है ,
तो क़दमों की क्या ज़रूरत फिर तुम्हे ..
गर ये तुम्हारा आसरा है ,
तो रिश्तों के अहमियत की ख़बर नही तुम्हे ..
गर तुम्हारे लिए नशा ही सब कुछ है ,
तो इंसानी रूप में रेंगने वाले कीड़े का स्वरुप मिला है तुम्हे ...
जागो इससे पहले के देर हो जाये ,
निकलो इस रंगीन पानी से बाहर ,
इससे पहले के तुम्हारी रूह भी तुमसे दगा कर जाए ...
मिली है ज़िन्दगी कुछ कर गुजरने के लिए ,
राह पकड़ मोहब्बत की ,
और कदर कर रिश्तों की अपने जीने के लिए ...!
 I am not preaching that one should never drink, but then everything has limits. Even Medical Practitioner also asks to drink in sensible quantity...even Defense ppl are advised for same...but in control
I go by the Tag line of my fav brand which says "Drink Responsibly". 
नशा अच्छी चीज़ हा यारों, बस नशे में नाश न करो
नशे का लुत्फ़ लो , नशे को यूँ बदनाम न करो  .... 
Be Happy n Be Blessed :)

Pic Courtesy : Google

Friday, 3 January 2014

बाल विवाह … अब और नहीं।

Something I wrote on Child marriage..
Long time back there was a show on Television...Satyameva Jayate..which used to throw light on all kind of social issues, which we still practice in our country. That show's each & every episode had moved me & hence I started writing down on social issues.
One more Hindi Poetry from me, focusing on cruel & inhuman Child Marriage custom. I strongly believe its, just a well planned formula of child/women exploitation which our society is still following....
Hope in 2014 we could eliminate...
जन्म लिया या जन्म दिया ..
जन्म लिया फिर जिया ...
या जन्म दिया फिर जिया ...
कुछ ऐसी हो गयी है अपनी आज की दुनिया ..!
जिस देश में भगवान भी बाल रूप में आये ...
उसी देश में बच्चों की खुशिओं का गला घोंट
प्रथा के नाम पे समाज में कुरीतियाँ बनाये ...!
खेलने - खाने के उम्र में
बच्चों का बचपन मिटाए ...
पढने-लिखने के उम्र में
व्यस्क वाले कर्मों में उलझाए ...!
कैसे वो माँ -बाप है जिन्हें उम्र होने पे भी ये समझ में न आये ..
क्यों बच्चों को उनके बचपन से वंचित करवाए ..
बिना अपराध किये उन बच्चों को अपराधी बनाए ..!
ये कैसा समाज है ..
जहां त्योहारों में "कन्या-पूजन " करवाए ...
व्रत में बच्चों को इतना मान दिया जाए ...
लेकिन अगले ही पल
बाल-विवाह के नाम पे उनका मर्दन किया जाये ..!
अरे क्यूँ अपने स्वार्थ में अंधे हुए हो
न गरीबी इससे मिटती है ..
न वंश इससे बढ़ती है ..
न तो दुनिया बदलती है ..
न तो कोई देवी प्रसन्न होती है ...!
अपनी ज़िम्मेदारी से पीछा छुड़ाने के लिए
क्यों सारे जहां में अपने ही समाज को कलंकित करते हो ...!
गर शिक्षित नहीं हो ..
तो क्या अक़्ल भी बेच खाए हो ...
अन्न उपजे खाते हो ..
या अपना ही मल्ल खाते हो ...!
क्यों बिना वजह नारी का अपमान
और पुरषों के चरित्र को बदनाम करते हो ...!
किस वेद-उपनिषद् में न लिखा है ..
ना ही किसी कानून में लिखा है ..
फिर किसकी बिनाह पे उनपे इतना ज़ुल्म ढाते हो ...!
अरे जागो अपने मद में चूर रहने वालों
ज़रा स्त्री-पुरुष के अनुपात पे भी नज़र डालो ...!
गर ये खेल ऐसे ही चलता रहा ..
बच्चों का ऐसा ही शोषण होता रहा ..
तो वो दिन दूर नही ..
जब सारे देश में ..
भारत सभ्यता और संस्कृति के बजाये ..
हिजड़ो का देश कहा जायेगा ...!
बस एक अच्छे सोच से ही समाज सुधर पायेगा ..
और एक स्वस्थ दिमाग ही ..
हर मुश्किल को आसान कर पायेगा।
Lets pray & work towards a better India..i know not easy...charity begins at home at first & blah blah...but am already on the way..i wish to succeed on that...
Keep Smiling & Be Blessed :)
 

Education/ शिक्षा

Education is one of the most important element in anybody's life. Literacy brings changes & it result in all-round development. With Education we not only generate awareness but also creates a passion to increase knowledge & keep ourselves updated. At present time, we have all the resources to learn & develop our skills, so its better we should motivate ppl towards using all those resources & make our surroundings more accessible..!

Though we are no more inferior on global map, but still we face lot of criticism whenever there are any kind of comparison with other country. We really need to work on our National speaking language i.e. Hindi, so that it could get same kind of respect as how the languages like Chinese/Spanish/German get importance on International forum.

Lets First with Education...
A small step by Me towards understanding of Education, especially in India..







कोई ज्ञान की बात नहीं करने आया ..
बस इतना कहने आया ...
क्या जो लिखा वो सिर्फ पढने में आया ...
या फिर समझ में भी नहीं आया ...
कैसी विडम्बना दिखती है इस देश की ..
भौतिकवाद की चकाचौंध में लिप्त हर चीज़
फिर भी साक्षर नहीं दिखती इंसानी बीज
एक देश कहता बड़े काबिल भारतवासी
दूजा कहता किसी काम के नहीं सिन्धु पार वासी ...
साक्षरता ऐसी ताक़त है
जो बिना बोले क़यामत लाती है ...
कलम की धार तलवार से भी ज्यादा काम आती है ...
शिक्षा से ही असली सुधार होगा ..
सारे जहाँ में तभी ज्ञान का संचार होगा ..
और सुधरता हुआ एक नया समाज होगा ..
मत भूलो और याद रखो ...
वो शिक्षा ही कमज़ोर कड़ी थी ..
जिससे अंग्रजो ने हमें जी भर कर गुलामी करवाई ..
सिर्फ अपनी सहूलियत के लिए ..
दुसरे भाषा की उन्होंने अपने देश में नीव डलवाई ..
लेकिन उनकी ही भाषा को हमलोगों ने अपनाया ..
और उनको उनके देश का नक्शा समझाया ...
तो आओ एक कदम उठाएं ...
अपने इर्द गिर्द सबको पढने लिखने का जज्बा जगाएं ...
आज के लिए नहीं ..
बल्कि भविष्य के लिए एक नया समाज बनाएं ..
शिक्षा का कोई जात पात नहीं ..
आओ उसे अपना एकमात्र निभाने वाला कर्म बनाएं ...!



We should always remember that it was British who, to overpower our language & culture, implemented English language in our country..but we mastered over the language & in due time we have achieved huge importance. But we also need to remember that Hindi should be our Priority...

मैंने इतना कुछ इंग्लिश में कहा लेकिन कविता को हिंदी में इसलिए कहा ताकि मेरी बात ज़यादा से ज़यादा लोगों तक पहुंचे।  जिस तरह शिक्षा हमारी जीवनशैली का अभिन्न अंग है वैसे ही हम भारतियों के लिए हिंदी भाषा भी अपने देश में सर्वप्रथम बोली जानी वाली भाषा होनी चाहिए। उम्मीद है मैंने किसी को भी ठेस नही पहुँचाया है।

Keep Smiling & Be Blessed! :)

Pic Courtesy : Google

Thursday, 2 January 2014

भ्रष्टाचार / Corruption

Corruption ki maar apna desh bahut dino se bhog raha hai aur iski jadein hamin ne daali hai...aur ham hi iska niwaaran kar sakte hai..ek aisi process hai jismein chain reaction hai aur har aadmi aaj ke date mein pareshaan hai. Isi pe ek roshni..


भ्रष्ट होती दुनिया भ्रष्ट होते लोग
खुदा की बनाई हुई दुनिया में
मतलबपरस्त हो गए है लोग ...
हर चीज़ को पाना है
हर मुकाम हासिल करना है
उस मंजिल पे पहुचने के लिए
अपना अस्तित्व इतना क्यों गिराना है ...
तुम दो मांगो वो चार मांगे
कोई छुपके मांगे तो कोई बेशर्मी से मांगे
माँगना भी तो भीख है
क्यूँ न इस भिखारी के हाथ काटे ...
किसी को अपने वर्चस्व की धौंस है
किसी को अपने ओहदे की धौंस है
अंधी भूख में ऐसे पागल हुआ है इंसान
इंसानियत तो गुम हुई न जाने कितने दूर कोस से ...
कानून भी बना हुआ था
आक्रोश भी खूब आया था
फिर क्यूँ नहीं कोई बदलाव आया
क्या स्वार्थ इंसान को इतना खा गया था ...
बेकार की बहस छोडो
औरों के गिरेबां में झांकना छोडो
और अपने में झांको
फिर अपने ईमान को टटोलो ...
गर तुमने कभी कोई लालच को जन्म नहीं दिया
अपने क्षणभंगुर चाहत की पूर्ति के लिए किसी को नीचा नही किया
तो आओ, ये लो ,
और उस भ्रष्टता पे सबसे पहला पत्थर तुम मारो ..!

मेरे अपने ....!

Yun toh pehle main sirf aashiqui pe likhta rahta tha, lekin ek bar ek aisi pic se nazar mili ke khud ko likhne se rok nhi paya tha & tab mere likhne ke maayne badal gaye..! Is Tasvir ne mujhe kaafi kuch sochne pr majbur kia & tab jo bhi dil-o-dimaag mein aaya usey ukera aur logon ke saamne rakha...aap bhi apni pratikriya zarur dijiye.




Pesh-e-Khidmat hai :

***** मेरे अपने ....!*****

तुम भी मेरे जैसे दिखते हो
मेरे ही जैसे लिबास में
मेरे ही समाज में
हर पल मेरे साथ रहते हो ...
किस्मत का दोष है
या फिर करनी का दोष है
जिसने दुनिया में मुझे ऐसे लाया
या फिर उस मौला का दोष है ...
ज़िन्दगी की दौड़ में तुम भी हो
हर साँस के कर्ज़दार तुम भी हो
फिर ऐसा क्यों है
तुम्हे हर ऐश-ओ-आराम से नवाज़ा गया
और मुझे ज़िल्लत में पाला गया ...
क्या गरीबी वो औकात है जिसकी कोई जात नही
या अमीरी वो आलम है जिसमे कभी रात नही
एक ही खुदा ने बनाई ये इंसानी जिस्म
फिर इंसानियत में कोई समानता क्यों नही ...
हम रोज़ आमने सामने
गुज़रते हुए एक दुसरे को देखते है
तुम हमें धिक्कार के नज़र फेरते हो
हम तुम्हे सपनो की तरह देखते है ...
ज़िन्दगी दी है उस खुदा ने
बस उसी को याद कर जिए जाते है ..
हर तपन को जाड़े की धुप समझ
बिना रुके बढे जाते है ...
क्यूंकि हम जो रुक गए
तो तुम्हारे ऐश-ओ-आराम खलल पड़  जाते हैं !

तू कौन है ...?

Kuch din pehle ki likhi hui kavita jo 2013 Independence Day ke liye likhi thi..kahin kho gayi thi..aaj wapas mil jaane pe share kar rha hun..! Ye maine us samay ke time ke according likha tha jab Border per bahut tention hone ke baawjud apne PM ke taraf se koi nhi tough stand nhi lia gaya tha....!




तू कौन है ...?
````````````````
तू अपना ही है,
लेकिन तू भेदी है ..
फिर नेता कौन है ?

तु शहीद है,
लेकिन तू बलि है ..
फिर सिपाही कौन है ?

तू तिरंगा है,
लेकिन तू बाँटा हुआ है ..
फिर इकरंगा कौन है ?

तू इमानदार है,
लेकिन तू अँधा है ..
फिर क़ानून कौन है ?

तू पूज्य है,
लेकिन तू पत्थर है ..
फिर भगवान कौन है ?

तू स्वाधीन है,
लेकिन तू नौकर है ..
फिर आज़ाद कौन है ?

तू देश है,
लेकिन तू विभाजित है ..
फिर संयुक्त कौन है ?


Pic Courtesy : Google

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Complicated माहौल में simple सा बंदा हूँ। दूरियाँ तो जायज़ है फिर भी ऐसे हमेशा करीब हूँ। कुछ लिख कर, कुछ पढ़कर, सबसे कुछ सीख कर, अकेला ही सही, एक मंज़िल के लिए निकला हूँ।