Sunday, 30 October 2016

साथ...!!


Kabhi beparwaah sa, kabhi apna sa..
Bas tere saath se, wo pal tha judaa sa..!

Kabhi bewaqt sa, kabhi sakht sa..
Bas tere saath se, wo waqt tha thahra sa..!

Kabhi bematlab sa, kabhi khurdura sa..
Bas tere saath se, wo ehsaas tha makhmali sa..!

Dhalti shaam si, badalte mausam sa..
Bas tere saath se, wo lamha tha zindagi sa..!!

कभी बेपरवाह सा, कभी अपना सा..
बस तेरे साथ से, वो पल था जुदा सा ..!

कभी बेवक्त सा, कभी सख्त सा..
बस तेरे साथ से, वो वक़्त था ठहरा सा ..!

कभी बेमतलब सा, कभी खुरदुरा सा..
बस तेरे साथ से, वो एहसास था मखमली सा ..!

ढलती शाम सी, बदलते मौसम सा..
बस तेरे साथ से, वो लम्हा था ज़िन्दगी सा ..!
©Abhilekh


Rap Lyrics... Bol Bachan/ बोल बचन

Bhai jeb ka aisa haal hai,
Na daal hai na maal hai,
Liqour kabse lull ho gaye..
O sun bhi le takle DJ,
Idhar bhi latest taal hai!!
Daaru puri thi chadhi,
Tuti saali nayi ghadi,
Call pr call thi aayi,
Bhai..gaadi teri hai ladi.!!
Chhod ke party, nikla naughty..
Quarter mein thi, sari hottie..
Addhe mein wo raat thi..
Censor maan ki aankh thi!!

Rap:
Baat meri tu sunle kaake, Rakh le pise tu daba ke
Kitno se  tu leta hai, kitno ko tu deta hai,
Sabse equal, pura total, sabka equal leta hai..
Rakh ke apne dil pe haath, de tu apne soul ka saath
Ya Kar le usse 2-2 haath, haan bol di maine apni baat.

Paisa hai na fame hai,
Time ka sara game hai,
Bhulna mujhe easy nahi..
Record apun ka name hai!!
Likhta main to pehle bhi tha,
Abhi thoda sa change hai,
Hindi wali poetry mein..
Rap ka apna trend hai..!!
Zara sa waqt mai bhi lunga,
Aise hi jawab bhi dunga,
Abhi to jaani aisa hai..
Ye sab tere jaisa hai,
Job n passion same hai..
Naam hi apun ke fame hai!!
©Abhilekh

Saturday, 29 October 2016

Pre tuned Lyric.. तुम ही हो।




Tere Siwa Koi Dikhta Nahi,
Tujhme Hi Sirf Hai Aks Mera...
Tujhse Juda Ho Jina Nahi,
Tujhme Hi Sirf Khudaa Mera..
Kyunki Tum Hi Ho, Ab Tum Hi Ho..
Meri Zindagi Tum Hi Ho..
Bandigi Aur Trishanagi,
Meri Aashiqui Ab Tum Hi Ho ..!

Tera Rasta Dekhte Hai,
Kisi Pal Ki Koi Khabar Nahi..
Har Lamha Tujhe Yaad Karey,
Zamane Ka Koi Ilm Nahi..

Wo Waqt Kabhi Thahra Hi Nahi
Jab Ham Tere Yaad Mein Khoye Nahi..

Kyunki Tum Hi Ho, Ab Tum Hi Ho,
Meri Zindagi Tum Hi Ho...
Aawaargi Aur Deewanagi,
Meri Aashiqui Ab Tum Hi Ho ..!

Tum Hi ho, Tum hi ho...

Tere Wajud Se Dunia Meri,
Har Saans Meri Jaise Karz Tera..
Tere Liye Hi Ye Dunia Bani,
Tere Hi Jism Mein Rooh Mera...
Tujhse Hi Jine Ka Sabab Mera,
Har Rome Hua Talabgaar Tera...

Kyunki Tum Hi Ho, Ab Tum Hi Ho,
Meri Zindagi Tum Hi Ho...
Wo Falak Aur Ye Zamin Bhi,
Meri Aashiqui Ab Tum Hi Ho ..!


©Abhilekh


The Lyric is based on tune of Tum ho from Aashiqui 2.

Thursday, 27 October 2016

A Lyric.. रात भर।



Mujhe bhigo kar, Wo oas thi raat bhar..
Mujhe bhula kar, Wo sufi thi raat bhar..
Main wahi tha, Wo Rumi thi raat bhar..!!

मुझे भिगो कर, वो ओस थी रात भर..
मुझे भुला कर, वो सूफ़ी थी रात भर..
मैं वही था, वो रूमी थी रात भर..!!

Usey chum ke, boond sa..
Usey moond ke, neend sa..
Main lipta raha, us sey raat bhar,
Wo khwaab si rahi raat bhar..!!

उसे चूम के, बूँद सा..
उसे मूँद के, नींद सा..
मैं लिपटा रहा, उस से रात भर..
वो ख्वाब सी रही, रात भर..!!

Wo karib hai, Raqib si..
Jo door thi, Habeeb si..
Main simta raha, us me raat bhar,
Wo shama si rahi raat bhar..!!

वो करीब है, रक़ीब सी..
जो दूर थी, हबीब सी..
मैं सिमटा रहा उस में, रात भर..
वो शमा सी रही, रात भर..!!

©Abhilekh


Monday, 24 October 2016

ऐसी रात...।

ऐसी रात...


ऐसी तेज़ हवा और ऐसी रात नहीं देखी ...
2 बारिशों में स्याह ऐसी रात नहीं देखी,

बरस कर दोनों क्या न कह गए हमसे ...
कोरे अश्क़ों में घुली ऐसी बात नहीं देखी,

हर बूँद थिरक कर दे रही थी सिहरन ...
बदगुमानी की ऐसी बरसात नहीं देखी,

भीगते हैं तर-ब-तर तेरी दहलीज पर ...
रंजिशि की हमने ऐसी ज़ात नहीं देखी,

आज घुल जाने दो मुझे ख़िज़ाओं में ...
किसी भीगे कब्र की ऐसी रात नहीं देखी।।

©Abhilekh

Saturday, 15 October 2016

छोड़ दे...।।

छोड़ दे...।।

रात के टुकड़ों पे पलना छोड़ दे,
ओस के तपिश में जलना छोड़ दे।।

अब सितारे भी देखते है तुझे तन्हा
उम्मीद से दुआ में कहना छोड़ दे।।

सहर की धूप तेरा मुकाम बनेगी
अब इस चाँदनी में रहना छोड़ दे।।

जो दबा है दर्द उकेर दे लफ़्ज़ों में
यूँ रोज़ाना अश्क़ों में बहना छोड़ दे।।

अब यहाँ फ़रेब में वफ़ा लाज़मी है,
दूर होकर हुजूम से चलना छोड़ दे।।

©Abhilekh

Please note: 1st line Waseem Barlewi Ji ki nazm se li gayi hai...

Sunday, 9 October 2016

Lyric.. मोहब्बत नहीं मिलती...!!

मोहब्बत नहीं मिलती..!!
फ़क़त किसी को चाहने से मोहब्बत नहीं मिलती,
दिल में ना हो जुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती।
चँद लम्हे गुज़ार लेने से,
लटों को संवार देने से,
गेसुओं में खोकर मोहब्बत नहीं मिलती,
जिस्म बिकते है, मोहब्बत नहीं मिलती।
दिल में न हो....।।
जब सीरत बदनसीब हो,
और फ़रेब करीब हो,
सूरत की चमक में मोहब्बत नहीं मिलती,
सिलवटें मिलती है, मोहब्बत नहीं मिलती।
दिल में न हो...।।
रौनकें अब हैं मशगूल,
और इश्क़ है फ़िज़ूल,
एहसासों में अब मोहब्बत नहीं मिलती,
सब खो कर भी मोहब्बत नहीं मिलती।
दिल में न हो...।।
©Abhilekh

Friday, 7 October 2016

सब तेरे नाम...

सब तेरे नाम...

यह शफ़क़ शाम हो रही है अब,
शब भी तेरे नाम हो रही है अब।

ठहर जाओ दो घडी मेरी खातिर,
इंतज़ार सर-ए-आम हो रही है अब।

अभी तो रौशन हुई है महफ़िल,
शाम रँग-ए-जाम हो रही है अब।

तेरे लबों से छलक कर बिखरा हूँ,
चाहतें मेरी पैग़ाम हो रही है अब।

एक रात बना कर भुला दो मुझे,
यहाँ सहर नीलाम हो रही है अब।

©Abhilekh

Note: 1st line is from Dushyant Kumar's

Wednesday, 5 October 2016

हर चेहरा... ।।

हर चेहरा...।।

हर एक चेहरा यहाँ पर गुलाल होता है
फिर भी हम सबसे एक सवाल होता है।

जो दौड़ रहा है हम सबकी रगों में लहू,
हर जिस्म में वो क्यों सिर्फ लाल होता है।

जिंदगी रहने तक जो इतने घाव देते हो,
फिर जनाज़े पर क्यों नहीं बवाल होता है।

ज़रा देखना कभी रोटियों को बाँट कर,
चँद निवालों से यहाँ भूख हलाल होता है।

हर उरूज का एक दस्तूर है यहाँ जानिब,
उन्ही रास्तों से वापसी में ज़वाल होता है।

©Abhilekh

नोट: पहली लाइन : "हर एक चेहरा यहाँ पर गुलाल होता है" यह मुन्नवर राणा जी के नज़्म से ली गयी है।

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Complicated माहौल में simple सा बंदा हूँ। दूरियाँ तो जायज़ है फिर भी ऐसे हमेशा करीब हूँ। कुछ लिख कर, कुछ पढ़कर, सबसे कुछ सीख कर, अकेला ही सही, एक मंज़िल के लिए निकला हूँ।